अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा…

अफगानिस्तान में अभी अफरा-तफरी का माहौल है। एयरपोर्ट पर हजारों हजार लोगों की भीड़ जमा है। अफगानिस्तान में रह रहे अपने नागरिकों को निकालने के लिए सभी देश युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। भारत ने भी अपने लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी है। 

लोगों को निकालने के लिए भारत सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है। दो दशक तक चले युद्ध के बाद अमेरिका के सैनिकों की पूर्ण वापसी से दो सप्ताह पहले तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। एक दो दिन में अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन जाएगी। 

अफगानिस्तान के प्रेसिडेंट अशरफ गनी काबुल छोडकर ओमान चले गए। अफगानिस्तान की राजधानी समेत करीब-करीब हर बडे शहर में तालिबान के लडाके मौजूद हैं क्योंकि अमेरिका और इसके सहयोगियों द्वारा प्रशिक्षित अफगान सुरक्षाबलों ने घुटने टेक दिए। तालिबान का 1990 के दशक के अंत में देश पर कब्जा था और अब एक बार फिर उसका कब्जा हो गया है। अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए भीषण आतंकी हमलों के बाद वाशिंगटन ने ओसामा बिन लादेन और उसे शरण देने वाले तालिबान को सबक सिखाने के लिए धावा बोला तथा विद्रोहियों को सत्ता से अपदस्थ कर दिया। 
तालिबान के कब्जे से सबसे ज्यादा खौफजदा हैं अफगानी महिलाएं और लड़कियां क्योंकि जैसे ही तालिबान ने कुछ शहरों पर कब्जा किया तो सबसे पहले वहां की औरतों को किडनैप करके जबरदस्ती उनकी शादी तालिबानी फाइटर्स के साथ करवा दी। तालिबान के लोग महिलाओं के साथ रेप कर रहे हैं इसलिए वहां के लोग सबसे पहले अपने बेटियों को महफूज जगह पहुंचाना चाहते हैं। देर रात अफगानिस्तान से कुछ लड़कियां भारत पहुंची हैं। अफगानिस्तान की हर लड़की इस वक्त खौफ में हैं और मदद की गुहार लगा रही हैं। 

News Source – India TV

काबुल से 120 भारतीयों को लेकर जामनगर पहुंचा वायुसेना का विमान…

ANI के सूत्रों के मुताबिक अफगानिस्तान में फंसे बाकी भारतीय सुरक्षित इलाके में हैं और एक-दो दिन में उन्हें भी एयरलिफ्ट कर लिया जाएगा. विदेश मंत्रालय ने भी सोमवार को कहा था कि अफगानिस्तान की घटना पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे.

Source – ANI & News 18

तालिबान ने मांगी 15 से 45 वर्षीय महिलाओं की फेहरिस्त, पसरा खौफ…

तालिबान की वापसी से महिलाएं सबसे ज्यादा खौफजदा हैं, क्योंकि बीते दिनों कुछ प्रांतों पर कब्जे के बाद से ही उसके नेताओं ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था। उन्होंने जुलाई की शुरुआत में बदख्शां और तखर स्थानीय धार्मिक नेताओं को तालिबान लड़ाकों के साथ निकाह के लिए 15 साल से बड़ी लड़कियां और 45 साल से कम उम्र की विधवाओं की फेहरिस्त देने का हुक्म दिया था।

अगर यह निकाह हुए तो इन महिलाओं को पाकिस्तान के वजीरिस्तान ले जाकर फिर से इस्लामी तालीम दी जाएगी। मानवाधिकार वादियों का कहना है कि अफगानिस्तान में महिलाओं को यौन दासता में धकेलने की इस तालिबानी कवायद से दुनिया को पहले की तरह नजरें नहीं फेरनी चाहिए।

News Source – https://www.amarujala.com/