शाम को त्याग पत्र, सुबह को शपथ: मान गये ‘सुशासन बाबू’…

पटना। नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने, अपने गठबंधन सहयोगी लालू प्रसाद की राजद को धता बताने और पद पर फिर से काबिज होने के लिए विपक्षी भाजपा से हाथ मिलाने के एक दिन बाद गुरूवार को छठी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। कुमार के काफी तेज रफ्तार से किए गए इस दांवपेंच ने राज्य में राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने राजभवन के राजेंद्र मंडपम् में 66 वर्षीय नीतीश कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी को भी शपथ दिलाई गई। जदूय के राजद एवं कांग्रेस के साथ बमुश्किल दो साल पुराने गठबंधन से अलग हो जाने के बाद राज्यपाल ने नीतीश कुमार से दो दिन के भीतर सदन में अपना बहुमत साबित करने को कहा। इस संक्षिप्त समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और भाजपा नेता अनिल जैन भी मौजूद थे। समारोह में केवल कुमार और सुशील मोदी को शपथ ग्रहण कराई गई। नीतीश कुमार ने बुधवार रात मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने लालू यादव और पूर्ववर्ती परिदृश्य में उप मुख्यमंत्री रहे तेजस्वी समेत उनके कुछ परिजन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर गठबंधन साझीदार राजद के साथ तनातनी के बाद यह फैसला किया।
नीतीश कुमार ने शपथ ग्रहण करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ”हमने जो भी फैसला किया है वह बिहार और उसकी जनता के पक्ष में होगा। यह विकास और न्याय सुनिश्चित करेगा। यह प्रगति सुनिश्चित करेगा। यह सामूहिक निर्णय है। मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि हमारी प्रतिबद्धता बिहार की जनता के प्रति है।ÓÓ जदयू के राजग में लौटने से बदले राजनीतिक समीकरणों का असर वर्ष 2019 के आम चुनाव में पड़ सकता है। जहां भाजपा इस घटनाक्रम को लेकर फूली नहीं समा रही, वहीं विपक्षी खेमा व्याकुल हो गया है क्योंकि इस घटना ने भगवा दल के खिलाफ एकजुट होने के प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतीश कुमार को बधाई दी और कहा कि वह बिहार की समृद्धि के लिए एक साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हैं। राज्य विधानसभा में एकमात्र सबसे बड़ी पार्टी राजद को सरकार गठन का ”मौका नहीं दिएÓÓ जाने को लेकर विरोध दर्ज कराते हुए राजद या कांग्रेस का कोई नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुआ।
इस बीच दिल्ली में, कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने को लेकर कुमार पर निशाना साधते हुए उन पर ”स्वार्थी राजनीतिक उद्देश्योंÓÓ के लिए काम करने का आरोप लगाया। गांधी ने कहा, ”बिहार ने साम्प्रदायिकता विरोधी जनादेश दिया था लेकिन नीतीश कुमार अपने निजी राजनीतिक लाभों के लिए उनके (भाजपा के) पास चले गए।
सुशील मोदी ने शपथ ग्रहण करने के बाद कहा कि राजग की वापसी के साथ राज्य में विकास की प्रक्रिया पटरी पर लौट आएगी। उन्होंने कहा, ”जदयू-भाजपा गठबंधन बिहार को पहले नई ऊंचाइयों पर ले गया था। उस समय, लोगों को यह कहने में गर्व होता था कि ‘मैं बिहारी हूंÓ। पिछले 20 महीनों में कुछ गलत हुआ लेकिन अब जदयू भाजपा गठबंधन बिहार को फिर से नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।ÓÓ
जदयू, राजद एवं कांग्रेस के महागठबंधन को तोडऩे के बाद कुमार राज्य में नई गठबंधन सरकार के गठन का दावा करने के लिए सुशील मोदी और राजग के अन्य नेताओं के साथ मिलकर बुधवार देर रात राज्यपाल से मिले। उधर, तेजस्वी राजद के कुछ विधायकों और नेताओं को लेकर मध्यरात्रि के बाद राज्यपाल से मिलने राजभवन गए। उन्होंने मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा कि राजग सरकार का शपथ ग्रहण करना ”पूर्व नियोजित षडयंत्रÓÓ था।

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