बिजनौर पुलिस दरोगा हत्याकाण्ड – रिश्तेदारों से 12 हजार रुपए लेकर चौकी के लिए निकले थे दरोगा सहजोर जेब में मिले मात्र 4600 रुपए…

नांगल सोती। 5 रातें और 5 दिन बीतने के बाद भी पुलिस दरोगा हत्याकाण्ड को सुलझाने में विफल है। ये किसी आम आदमी की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि पुलिस के अपने ही एक दरोगा की हत्या का मामला है, वो भी ऑन ड्यूटी तथा अपने ही तैनात क्षेत्र में निर्मम हत्या का। इससे सवाल उठाने लगे हैं कि क्या बदमाश पुलिस से बहुत ज्यादा शातिर हो गए हैं। डीआई ओंकार सिंह का कहना है कि पुलिस अभी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची, अभी तक दरोगा का सर्विस रिवाल्वर भी गायब है।
ज्ञातव्य है कि मण्डावर थाने की बालावाली पुलिस चौकी के इंचार्ज एसआई सहजोर सिंह मलिक की गत 30 जून की रात्रि सरेशाम उस समय धारदार हथियार से काटकर निर्मम हत्या कर दी गईथी, जब वे मण्डावर-बालावाली मार्ग से बालवाली पुलिस चौकी जा रहे थे तथा चौकी से मात्र एक किमी. दूर ही रह गए थे। एसटीएफ सहित पुलिस की कई टीमें इस हत्याकाण्ड को सुलझाने में लगी हुई हैं, मगर 5र ातें तथा 5 दिन बीतने के बाद भी मामला वहीं ढाक के तीन पात है। दरोगा की निर्मम हत्या क्यों और किसने की, पुलिस अभी तक इसका सुराग नहीं लगा पाई है। पुलिस टीमें दिन-रात लगी हुई हैं, मगर पुलिस न ही दरोगा के हत्यारों तक पहुंच पाई है और न ही दरोगा के सर्विल रिवाल्टर तक। उल्लेखनीय है कि दरोगा का सर्विस रिवाल्वर भी होलेस्टर से गायब था। इससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या बदमाश, बिजनौर पुलिस से कहीं ज्यादा शातिर हैं। क्या बदमाश कोई ऐसा सबूत छोड़ ही नहीं गए हैं, जो पुलिस 5 दिन बाद भी हत्यारों तक नहींपहुंच पा रही है, जबकि ये किसी आम आदमी का मा मर्डर नहीं है। ये मर्डर पुलिस के अपने ही एक दरोगा का है, जो ड्यूटी पर गये थे तथा अपने तैनाती क्षेत्र में ही थे।
डीआईजी मुरादाबाद ओंकार सिंह इस हत्याकाण्ड क े खुलासे के लिए लगातार बिजनौर में ही डेरा डाले हुए थे तथा पुलिस को आवश्यक दिशा निर्देश दे रहे थे। 4 दिन बाद मंगलवार की शाम डीआईजी भी वापस मुरादाबाद लौट गए हैं।
डीआईजी ओंकार सिंह ने बताया कि पुलिस के हाथ अभी कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं लगा। अभी तक पुलिस के हाथ दरोगा का गायब हुआ सर्विस रिवाल्वर भी नहीं लगा है। पुलिस की जांच लगातार जारी है। डीआईजी ने यह भी बताया कि विवेचना में यह तथ्य तो सामने आया है कि दरोगा ने रिश्तेदारी में से 12 हजार रुपए लिए थे और उनकी जेब में मात्र 4600 रुपए मिले, मगर एक हाथ की उंगली में से सोने की अंगूठी गायब होने का तथ्य विवेचना के दौरान प्रकाश में नहीं आया है। डीआईजी को विश्वास है कि जल्द ही पुलिस के सामने कोई ठोस क्लू जरूर आयेगा, जिससे पुलिस घटना का खुलासा कर पाएगी।

रिवाल्वर सबसे बड़ी चुनौती

नांगल सोती। पुलिस 5 दिन बाद भी दरोगा मडर्र केस में खाली हाथ है, तो पुलिस ने हिस्ट्रीशीटरों, हाई क्राम में जेल गए लोगों से भी पूछताछ शुरू की है। पूरे जनपद की पुलिस अपने थाना क्षेत्र के एचएस और हत्या, लूट आदि बड़े अपराधों में जेल गए तथा अब जमानत वगैरह पर बाहर आए लोगों से पूछताछ कर रही है। कोई क्लू हाथ न लगने से परेशान पुलिस सोच रही है कि शायद इसी तरह से पुलिस केहाथ कोई सुराग नहीं लग जाए। सूत्रों के अनुसार दरोगा मर्डर केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दरोगा का रिवाल्वर ढूंढने की है।

अभी तक पुलिस के हाथ खाली

नांगल सोती। वैसे तो दरोगा की उसी के तैनाती क्षेत्र में निर्मम हत्या कर बदमाशों ने पुलिस को पहले ही खुला चैलेंस दिया था, मगर जिस तरह से पांच दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं, उससे पुलिस का चैलेंज और बड़ा हो गया है। पुलिस विभाग में तो दरोगा हत्याकाण्ड छाया हुआ है ही, आम जनता में भी यहां-वहां, जहां-तहां इसी हत्याकाण्ड की चर्चा है। आम जनता में भी दरोगा हत्याकाण्ड के खुलासे को लेकर काफी जिज्ञासा, उत्सुकता है। बुद्धिजीवी ऑन ड्यूटी दरोगा की निर्मम हत्या को पुलिस सिस्टम पर बदमाशों का करारा हमला मान रहे हैं।

उत्तराखण्ड के बदमाश भी शक केे घेरे में

बालावाली। दरोगा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिये पुलिस ने सारे जोर लगा दिये हैं, लेकिन उसके हाथ अभी तक हत्यारों तक नहीं पहुंचे हैं। घटना में उत्तराखण्ड के बदमाशों का हाथ होने का शक भी जाहिर किया जा रहा है। बालावाली में गंगा नदी पर पुल बना है, तब से बालावाली चौकी से उत्तराखण्ड की दूरी तीन-चार किलोमीटर रह जाती है। पुलिस को लगता है कि उत्तराखण्ड के कई बदमाश बालावाली क्षेत्र में सक्रिय हैं, अत: पुलिस इस बारे में भी छानबीन कर रही है। इसके अलावा पुलिस ने कई अन्य लोगों को पूछताछ के लिये उठाया है। एएसपी ने बताया कि पुलिस टीम लगातार वर्क कर रही है जल्दी ही केस का खुलासा होने की उम्मीद है।

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