बिजनौर – गंगा का जलस्तर बढऩे से लोग चिंतित,गांवों में पानी घुसा, प्रशासन के उपायों की खुली पोल…

मण्डावर। पहाड़ों पर लगातार हो रही घनघोर बारिश के कारण गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण जहां गंगा के किनारे स्थित खेतों का लगातार कटान हो रहा, वहीं खेतों में खड़ी गन्ने व चारे की फसल भी गंगा में बह रही है। इतना ही नहीं अब गंगा के किनारे बसे गांवों के अंदर भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। खादर क्षेत्र के गांव कुंदनपुर को भी गंगा के पानी से खतरा उत्पन्न हो गया है। जिन बच्चों को नावों से गंगा पार करके स्कूल जाना पड़ता है, उनके माता-पिता को जब तक बच्चे घर नहीं लौट आते चिंता बनी रहती है। जिन ग्रामीणों के खेत गंगा पार स्थित हैं, वे अपने पशुओं के लिए चारा भी नावों में लाने को मजबूर हैं। उधर रावली न्याय पंचायत के ग्राम ब्रह्मपुरी में मालन नदी का रपटा टूट जाने से बुरा हाल हो गया है। गांव में पानी भर गया है। वहां के प्राथमिक स्कूल में दो-दो फिट पानी भर गया है। दूसरी ओर पहाड़ों पर अभी भी लगातार बारिश होने की खबर से गंगा के किनारे स्थित गांवों के लोगों की भी चिंता बढ़ती जा रही है। गंगा की धार गांवों की ओर रुख कर लेने से ग्रामीण बेहद चिंतित हैं। उन्हें अपनी तबाही सामने नजर आ रही है। फसलों से आच्छादित उनकी सैकड़ों बीघा जमीन तो गंगा में समा ही चुकी है, अब घरों के अस्तित्व पर खतरा मण्डरा रहा है।

प्रशासन के उपायों की पोल खुली

बिजनौर। पहाड़ों पर हो रही बारिश ने जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए किये गये कथित उपायों व इंतजामों की पोल खोल दी है। गंगा और मालन में उफान आने से आसपास के कई गांवों में पानी भर गया है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें अपने ही साधनों से जीवन चलाना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा पूर्व में किये गये बाढ़ नियंत्रण और बचाव के कथित उपाय कहीं नजर नहीं आ रहे। ग्रामवासी अपनी जर्जर नांवों और ट्यूब के सहारे नदियों को पार करने को मजबूर हैं। छोटे-छोटे बच्चे जान हथेली पर रखकर स्कूल जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों की अभी सुध नहीं ली है। रावली, ब्रह्मपुरी, कुंदनपुर आदि में हर साल गंगा व मालन का पानी घुस जाता है, जिससे बरसात भर ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त रहता है। यहां स्थायी तटबंध बनाने की बात वर्षों से की जा रही है, लेकिन सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों और अखबारों में नजर आती हैं। प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने के उपाय भी सिर्फ कागजों और बयानों तक सीमित हैं। पिछले कई दिनों से पहाड़ों पर हो रही बारिश से गंगा सहित सभी नदियों का जलस्तर बढ़ रहा था, जिसकी जानकारी प्रशासन को दी थी, लेकिन अधिकारियों ने ग्रामीणों को मुसीबत से बचाने की कोई कोशिश नहीं की।

तेजी से बढ़ रहा है सभी नदियों का जलस्तर

बिजनौर। गंगा सहित जिले की सभी नदियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिले में भले ही बारिश न हो रही हो, लेकिन पहाड़ों पर पिछले कई दिनों से जबर्दस्त वर्षा पड़ रही है, जिससे नदियों में उफान आ गया है। मालन, गांगन, खो, नकटा आदि नदियों में उफान आने से आसपास के गांवों और खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसान चिंतित हैं। हरिद्वार से गंगा में पानी छोड़े जाने से जिले में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गये हैं। बिजनौर गंगा बैराज पर पानी का स्तर बढ़ रहा है, जिस पर सिंचाई विभाग के अधिकारी नजर रखे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि इस महीने भारी बारिश होने का अनुमान है, जिसे देखते हुए प्रशासन को स्थिति से निपटने के लिए विशेष इंतजाम कर लेने चाहिएं। पूर्व के वर्षों में बाढ़ से जिले में जनधन की भारी हानि हो चुकी है। देखा जाता है कि बाढ़ आने के बाद ही प्रशासन की आंखें खुलती हैं, लेकिन तब तक जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ जाता है। इस बार ऐसी नौबत न आये, इसके लिए जरूरी इंतजाम पूरे कर लेने चाहिएं।

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